मुझे कभी भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। मेरी मां और बड़ी दीदी ने शुरू से मुझे खूब सपोर्ट किया। मेरी मां भले ही पढ़ी-लिखी नहीं थी, पर उन्होंने हम 5 बहनों के साथ कभी दोयम दर्जे का सलूक नहीं किया। मेरी बहन सरस्वती भी अंतरराष्ट्रीय ऐथलीट रही हैं तो उन्होंने मुझे कदम-कदम पर गाइड किया। गांव वाले जरूर ताने मारते थे, तो उन्हें मेरे मेडलों ने जवाब दे दिया।
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