आजादी के बाद लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी के बिना यह पहला चुनाव होगा। लखनऊ वालों के नाम न तो इस बार उनकी कोई चिट्ठी आएगी और न भाजपा उम्मीदवार को आशीर्वाद के रूप में कोई संदेश। बावजूद इसके लखनऊ की जंग ‘अटल’ रंग में ही रंगी दिखेगी।
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