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Wednesday, August 21, 2019

राष्ट्रवाद से ट्रांसपोर्ट तक, तैयार हैं डूसू चुनाव के मुद्दे

नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) की चुनावी जंग का दिन तय हो चुका है और सभी यूनियन पूरी तैयारी में हैं। 12 सिंतबर को वी-डे है और इस दिन को जीतने के लिए कॉलेज से क्लास तक हर यूनियन के वे स्टूडेंट्स पहुंच रहे हैं जो संभावित कैंडिडेट होंगे। बीजेपी की स्टूडेंट्स विंग के लिए पिछले साल के '' के साथ इस बार कश्मीर का ताजा ताजा मुद्दा अहम है। कांग्रेस की स्टूडेंट्स विंग एनएसयूआई पिछले साल जीते एबीवीपी के डूसू प्रेजिडेंट की फर्जी डिग्री के अलावा अब नॉर्थ कैंपस में सावरकर की मूर्ति लगाने को अपना मुद्दा बना चुकी है। लेफ्ट विंग आइसा चुनावी रेस में , हॉस्टल से लेकर एबीवीपी की मनमानी के खिलाफ तैयार है। एबीवीपी के स्टेट मीडिया इंचार्ज आशुतोष सिंह कहते हैं, हमने 10-12 स्टूडेंट्स चुने हैं, जो रोजाना 700 से 800 स्टूडेंट्स से मिल रहे हैं। उनसे जाना जा रहा है कि मैनिफेस्टो कैसा हो। इन्हीं में से 6 से 7 कैंडिडेट नॉमिनेशन फाइल करेंगे। इस बार कश्मीर अहम मुद्दा है और हम स्टूडेंट्स को बता रहे हैं कि लेफ्ट किस तरह से कश्मीर के बारे में सोचती है। आर्टिकल 370 हटने के बाद जेएनयू में कश्मीरी स्टूडेंट्स ने सेना को जो बुरा-बुरा कहा, हम यह भी उन्हें बता रहे हैं। डूसू प्रेजिडेंट शक्ति सिंह के बिना इजाजत नॉर्थ कैंपस में सावरकर की मूर्ति लगाने की घटना एनएसयूआई के लिए नया मुद्दा बन गई है। अगर मूर्ति नहीं हटती है, तो यूनियन इसका फायदा उठाते हुए स्टूडेंट्स के बीच होगी। एनएसयूआई के स्टेट प्रेजिडेंट अक्षय लकड़ा का कहना है, अंग्रेजों से माफी मांगने वाले सावरकर सुभाष चंद बोस, भगत सिंह की बराबरी कैसे कर सकते हैं? डूसू सेक्रटरी एनएसयूआई के आकाश चौधरी ने शिकायत दिल्ली पुलिस को भी दी है। दूसरी ओर, आइसा की स्टेट प्रेजिडेंट कवलप्रीत कौर का कहना है, मेट्रो किराया कम करने, हॉस्टल, 24 घंटे लाइब्रेरी की मांग के अलावा पर्यावरण का मुद्दा भी हमारी लिस्ट में है। स्टूडेंट्स के मुद्दों पर हम सर्वे भी कर रहे हैं और इसके बाद कैंडिडेट फाइनल हो जाएंगे। वहीं, सीवाईएसएस का चुनाव लड़ने का मूड नहीं दिख रहा। सीवाईएसएस के दिल्ली जनरल सेक्रटरी हरिओम पंवार का कहना है कि डूसू लड़ने पर फाइनल कुछ तय नहीं हुआ है। वैसे, हम करीब 40 कॉलेजों की यूनियन के चुनाव लड़ेंगे, पिछले साल 25 कॉलेजों में जीते भी थे।


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