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Monday, June 8, 2020

किराया लाखों में, सेल हजारों में सिमटी... संकट में दिल्ली के पॉश इलाकों की दुकानें

नई दिल्ली 'मैं पिछले 20 साल से खान मार्केट में अपना कैफे और बुक स्टोर चला रही थी। लॉकडाउन से दो-ढाई महीने काम बंद रहा। आगे भी हालात जल्द ठीक होने के आसार नहीं है। हमने प्रॉपर्टी के ओनर से अनुरोध किया था कि वह लॉकडाउन के दौरान का किराया माफ कर दें और आगे के कुछ महीनों के लिए किराए में कुछ छूट दें। मगर वह तैयार नहीं हुए। हमारे लिए बिजनेस चला पाना यहां तक कि रेंट तक निकालना मुश्किल हो रहा था। हमें अपने दो दशक पुराने कैफे और बुक स्टोर को बंद करना पड़ा। जीके में पहले ही हमारा कैफे और बुक स्टोर सील हो चुका है। अब हमारे पास सिर्फ निजामुद्दीन का एक कैफे रह गया है। वहां के ओनर ने फिलहाल किराए में थोड़ी छूट दी है।' यह कहना है प्रियंका मल्होत्रा का, जिन्हें किराए की दिक्कत के चलते दिल्ली के सबसे महंगे बाजार खान मार्केट में स्थित अपना मशहूर रेस्तरां कैफे टर्टल बंद करना पड़ा। खान मार्केट स्थित एक अन्य रेस्तरां साइड वॉक को भी इसी वजह से बंद करना पड़ा। एक अन्य रेस्टोरेंट स्मोक हाउस पर भी ताला लटका है। वह कब खुलेगा, किसी को नहीं पता। 'किराया देना भी भारी पड़ रहा'यहां एक बुटीक चलाने वालीं खुशबू ने बताया कि 20 मई से अब तक उनकी बमुश्किल 20-25 हजार रुपये की ही सेल हो पाई है, जबकि बुटीक का किराया ही करीब दो लाख रुपये है। यहां की मार्केट असोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने बताया कि यहां कई सारे रेस्टोरेंट्स और शॉप्स का एग्रीमेंट मार्च-अप्रैल में रिन्यू होना था। किराए में एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार बढ़ोतरी भी होनी थी, मगर इन हालातों में तो लोगों को किराया देना भी भारी पड़ रहा है। इस मामले में सरकार की तरफ से भी मदद नहीं मिल रही है। कई सारे रेस्टोरेंट्स तो गाइडलाइंस की वजह से नहीं खुल पा रहे हैं। ऐसे में कई लोगों का बिजनेस ठप हो रहा है। सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार करना चाहिए और बिजली बिलों व प्रॉपर्टी टैक्स में छूट देनी चाहिए। बिजनेस चला पाना मुश्किल कनॉट प्लेस के दुकानदार भी कस्टमर्स को तरस रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि मार्केट में पहले जैसी रौनक लौटना तो दूर, इक्का-दुक्का कस्टमर भी नहीं आ रहे हैं। लग ही नहीं रहा है कि लॉकडाउन खत्म हो गया है और मार्केट खुल गया है। लोग अब भी कोरोना के डर के चलते बाहर नहीं निकल रहे। इसकी वजह से सीपी में भी ऐसे कई रेस्टोरेंट्स और स्टोर्स बंद पड़े हैं, जो किराए की जगह पर चलते हैं। नई दिल्ली की ट्रेडर्स असोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने बताया कि इस वक्त सीपी, खान मार्केट, जीके, साउथ एक्स, लाजपत नगर, करोल बाग जैसी तमाम जगहों पर बिजनेस चलानेवालों की हालत खराब है। जो लोग शॉप्स खोल रहे हैं, उन्हें भी फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है, क्योंकि कस्टमर आ नहीं रहे। ऐसे में जो लोग किराए पर रेस्टोरेंट या कोई स्टोर चला रहे हैं, उनके लिए अपना बिजनेस चला पाना मुश्किल हो गया है। हालांकि अभी सीपी से कोई अपना बिजनेस बंद करके तो नहीं गया है, लेकिन अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो लोग अपने रेस्टोरेंट्स या शॉप्स बंद करने को मजबूर हो जाएंगे। 'किराएदार और मालिक, दोनों के सामने मुसीबत' ग्रेटर कैलाश के पॉश एम ब्लॉक की मार्केट असोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शारदा ने बताया कि उनके यहां भी किराए पर शॉप्स चलाने वाले लगातार प्रॉपर्टी ओनर्स के साथ निगोसिएशन करने में लगे हैं। किराएदार चाहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान दुकानें बंद रही थीं, इसलिए दो-ढाई महीने का किराया माफ किया जाए। आगे भी किराए में कुछ छूट मिले, लेकिन कई सारे प्रॉपर्टी ओनर्स ऐसे हैं, जिनकी आय का साधन ही किराया है। उनके पर भी लोन और इंश्योरेंस चुकाने का दबाव है। ऐसे में दोनों पक्ष एक-दूसरे की परेशानियों का हवाला दे रहे हैं। मगर यह सही है कि इस वक्त पॉश इलाकों में रेंटेड प्रॉपर्टी में बिजनेस चला पाना बेहद मुश्किल हो रहा है।


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