पेशवाई में सबसे आगे भगवान गणेश की प्रतिमा थी। इसके बाद नागा सन्यासी अखाड़े के आराध्य देव भास्कर (सूर्य) की पालकी के साथ चल रहे थे। आधा दर्जन बैंडबाजों की धुन पर नागा संन्यासी जोश के साथ जयघोष भी करते चल रहे थे।
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